Monday, August 11, 2008

आशिकी में हर आशिक हो जाता है मजबूर...............(दिल का क्या कसूर)

2 comments:

harminder singh said...

बहुत बढि़या....
आपका धन्यवाद....

बहुत बढि़या....

आपका धन्यवाद.

गीत संगीत भीतर तक बैठ जाता है जो एक ताजगी भर देता है। गीत हों, सुनहरे हों और मन को छूते जायें तो कितना बेहतर हो।

इसी तरह धुनों में समाते जाईये ताकि दूसरे भी संगीत की लहरों को छूते जायें साथ-साथ।

यही संगीत है और संगीत ही मन का गीत है।

-harminder singh
(vradhgram)

harminder singh said...
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