Saturday, August 30, 2008

तू मेरे सामने है.................(सुहागन 1964)

3 comments:

दिलीप कवठेकर said...

कल मुकेश जी पर अपने ब्लोग पर एक दर्द भरा गीत पोस्ट किया, तब से मन विचल सा था.

आपके यहां आ कर थोडा सा नही, बहूत ज्यादा सूकून मिला, धन्यवाद!!

राज भाटिय़ा said...

धन्यवाद, इस सुनदर गीत के लिये

पारुल "पुखराज" said...

badaa manpasand geet sunvayaa aaj aapney..aabhaar