Sunday, October 12, 2008

तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत करेगे...............(तुम बिन)

3 comments:

BrijmohanShrivastava said...

कुछ लेख लिखिए -यदि गाने ही पसंद हैं तो उन गानों पर आपके विचार से क्या तब्दीली होनी चाहिए मसलन =जब तक जियेंगे बगावत करेंगे / और जैसे जियें तो जियें कैसे संग आपके = बगैरा =ये केसेट बगेरा तो सहज उपलब्ध है =आपका लिखा हुआ नायाब होगा -वह आपका अपना होगा =उसमें एक सुकून होगा एक आनंद होगा -और लेखन का एक संग्रह होगा जो आपका अपना होगा

राज भाटिय़ा said...

dhanyavaad is giT ke liye

PREETI BARTHWAL said...

सुन्दर गीत है। धन्यवाद