Thursday, October 9, 2008

तुमको भी है ख़बर मुझको भी है पता.................(कभी अलविदा न कहना)

3 comments:

फ़िरदौस ख़ान said...

बेहतरीन...

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

तीर स्नेह-विश्वास का चलायें,
नफरत-हिंसा को मार गिराएँ।
हर्ष-उमंग के फूटें पटाखे,
विजयादशमी कुछ इस तरह मनाएँ।

बुराई पर अच्छाई की विजय के पावन-पर्व पर हम सब मिल कर अपने भीतर के रावण को मार गिरायें और विजयादशमी को सार्थक बनाएं।

mehek said...

bahut achha geet