Sunday, September 7, 2008

दिल के टुकड़े टुकड़े करके मुस्कुरा कर चल दिए..........(दादा)

5 comments:

MANVINDER BHIMBER said...

maja aa gaya

वर्षा said...

वाह!

योगेन्द्र मौदगिल said...

Wah...
kya prastuti hai..

Shastri JC Philip said...

वाह, क्या बात है !!



-- शास्त्री जे सी फिलिप

-- हिन्दी चिट्ठाकारी के विकास के लिये जरूरी है कि हम सब अपनी टिप्पणियों से एक दूसरे को प्रोत्साहित करें

राज भाटिय़ा said...

अजी इन टुकडो को जल्दी से डा० के पास ले जाओ.शायद डा० साहिब इन्हे फ़िर से जोड दे.. :)
बहुत ही सुन्दर गीत.. कभी हमारी जुबान पर भी था.
धन्यवाद